Physiography of India

Physiography of India

PHYSIOGRAPHY OF INDIA

भारत महान भौतिक विविधता का देश है। विभिन्न शारीरिक विशेषताओं के आधार पर, भारत को छह शारीरिक विभाजनों में विभाजित किया गया है

1.उतरी और उतर -पूर्वी पर्वत(Mountains of India)

2. भारत का विशाल मैदान(Great Plains of India)

3. प्रायद्वीपीय पठार(Penisular Plateau of Inida)

4. भारतीय रेगिस्तान(Indian Desert)

5. तटीय मैदान(Coastal Plains of India)

6. द्वीप(Islands of India)

Great Plains of India

Indus -Ganga-Brahmaputra Plains of India

  • हिमालय पर्वत तथा दक्षिणी प्रायद्वीपीय पठार के बीच सिन्धु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदियों की निक्षेप क्रिया द्वारा निर्मित एक विशाल मैदान स्थित जिसे सिन्धु गंगा ब्रह्मपुत्र मैदान कहते हैं ।
  • भारत के उतरी भाग में स्थित होने के कारण इसे उतरी भारत का मैदान भी कहते हैं ।
  • इसकी लम्बाई लगभग 3,200 किमी तथा चोड़ाई 150 से 300 किमी है ।
  • असाम में यह मैदान संक्रा है और यहाँ इसकी चोड़ाई 90 से 100 किमी है जो बढकर इलाहाबाद के निकट 280 किमी हो जाता है उच्चावच की दृष्टि से इस मैदानी भाग का विवरण निम्न प्रकार से है –

भाबर क्षेत्र (Bhabar Region)

  • भाबर प्रदेश शिवालिक के गिरिपाद प्रदेश में सिन्धु नदी से तीस्ता नदी तक पाया जाता है ।
  • यह प्रदेश 8 से 16 किमी चोड़ाई वाली संकरी पट्टी के रूप में स्थित है ।
  • गिरिपाद पर स्थित होने के कारण इस क्षेत्र में नदियाँ बड़ी मात्र में पत्थर, कंकर, बजरी, आदि लाकर जमा कर देती है जिससे पारगम्य चट्टानों का निर्माण होता है ।
  • अतः इस क्षेत्र में पहुचकर अनेक छोटी छोटी नदियाँ भूमिगत हो जाती हैं यह प्रदेश कृषि के लिए अधिक उपयोगी नहीं है ।

तराई क्षेत्र (Tarai Region)

  • यह भाबर के दक्षिण में वह मैदानी भाग होता है जहाँ भाबर की लुप्त नदियाँ फिर से भूमि पर प्रवाहित होती हुई दिखाई देती हैं इसे तराई प्रदेश कहते हैं ।
  • नदियों द्वारा निक्षेपित जलोढ़ के कण भाबर प्रदेश की तुलना में यहाँ अपेक्षाकृत महीन होतें हैं फलस्वरूप तराई प्रदेश में दलदल की अधिकता होती है ।
  • इसकी चोड़ाई 20 से 30 किमी होती है . दलदल तथा नमी की अधिकता के कारण तराई प्रदेश में घने वन तथा विविध प्रकार के वन्य जीव पाए जाते हैं ।
  • उतरी भारत के अधिकांश राष्ट्रिय उद्यान तथा वन्य जीव अभ्यारण्य तराई प्रदेश में ही हैं . तथा यह प्रदेश जैव विविधता का विशाल भण्डार है ।

बांगर प्रदेश (Bangar Region)

  • बांगर प्रदेश मैदान का बह उंचा भाग होता है जहां नदियों की बाढ़ का जल नहीं पहुँचता है ।
  • यह पुराणी जलोढ़ मिटटी द्वारा बना होता है ।
  • इसमें कंकड़ के रूप में चुनायुक्त संग्रथ्नों की अधिकता होती है यह प्रदेश कृषि के लिए अधिक उपयोगी नहीं हैं ।
  • पंजाब में मैदान में बांगर को धाया कहते हैं ।

खादर प्रदेश (Khadar Region)

  • खादर प्रदेश वह निचला भाग है जहाँ नदियों की बाढ़ का जल प्रति वर्ष पहुँचता है ।
  • बाढ़ के जल के साथ साथ नवीन मिटटी भी इस प्रदेश में बिछती रहती है ।
  • खादर प्रदेश का निर्माण नवीन जलोढ़ द्वारा होता है ।
  • खादर प्रदेश आत्याधिक उपजाऊ होते हैं और यहाँ गहन खेती की जाती है ।
  • पंजाब के मैदान खादर प्रदेश को बेट कहते हैं .

शंकु और अन्तः शंकु (Cones and Inter Cones)

  • इस विशाल मैदान में नदियों के निक्षेपण के परिणामस्वरूप जलोढ़ पंख अथवा शंकु तथा अन्तः शंकुओं का निर्माण हुआ है ।
  • हिमालय की घाघरा नदी को छोड़कर बाड़ी सभी नदियों ने जलोढ़ शकुओं का निर्माण किया है इन शंकुओं का आधार दक्षिण में मैदान की तरफ तथा शीर्ष पहाड़ियों से नदी के निकास बिंदु की तरफ होता है ।
  • इनका ताल उतल (Convex) होता है . अन्तः शंकुओं का आकार इसके ठीक विपरीत होता है और इसके किनारे अवतल (Concave) होते हैं . निक्षेप के विस्तार के साथ साथ शंकु एवम अन्तः शंकुओं के कुछ स्थानों पर आपस में मिलने से शंकु- पाद मैदानों का निर्माण होता है ।
  • हिमालय की महानंदा तीस्ता नदियों ने मिश्रित शंकुओं का निर्माण किया है ।
  • उतरी बिहार में गंडक और कोसी, झारखण्ड में महानंदा और तीस्ता नदियों ने बड़े पैमाने पर शंकुओं का निर्माण किया है ।
  • ये शंकु एक दुसरे से अन्तः शंकुओं द्वारा विभाजित है

डेल्टा (Delta)

  • गंगा तथा सिन्धु नदियों के डेल्टा इस मैदानी भाग के दो महत्वपूर्ण संरचनात्मक अंग हैं ।
  • गंगा का डेल्टा राजमहल की पहाड़ियों से सुंदरवन के किनारे तक 430 किमी की लम्बाई में फैला हुआ है ।
  • इसकी चोड़ाई 480 किमी है ।
  • गंगा के डेल्टा में तलछट के निक्षेप की मात्र अधिक तथा आत्याधिक गहराई तक विद्यमान है ।
  • इस डेल्टा में निक्षेपित तलछट के कण बहुत ही महीन हैं ।
  • सिन्धु नदी का डेल्टा यद्यपि 960 किमी लम्बा है किन्तु इसकी चोड़ाई 160 किमी ही है ।
  • सिन्धु नदी के डेल्टा में तलछट के निक्षेप की मात्रा भी कम है ।

भारत के प्रायद्वीपीय पठार( Peninsular Plateau of India)

  • यह भाग उतर में गंगा सतलुज मैदान से तथा शेष तीन दिशाओं में समुद्र से घिरा है ।
  • भ्रंश घाटी में बहने वाली नर्मदा इस पठार को मुख्य रूप से दो भागों में बांटती है – उतर में मालवा का पठार तथा दक्षिण में दक्कन का पठार . दक्कन का पठार किर्तेशिउस इयोसीन में लावा निकलने से निर्मित है ।
  • यह भारत का प्राचीनतम भू भाग है ।
  • मालवा का पठार मध्य प्रदेश एवं छतीसगढ़ राज्य में है यह लावा निर्मित पठार है ।
  • बुंदेलखंड पठार मालवा पठार के उतर व् पश्चिम में स्थित है । इसके पूर्व के छोटा नागपुर का पठार है जिसका सबसे बड़ा बाग़ रांची का पठार है । यहाँ खनिजों की भरमार है । दक्कन का पठार भारत में सबसे बड़ा पठार है इसके अंतर्गत महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश राज्यों के भू भाग आते हैं ।
  • यह काली मिटटी का क्षेत्र है , काली मिटटी को रेगुर मृदा भी कहते हैं जो की कपास की कृषि के लिए प्रसिद्ध है ।
  • गोदावरी नदी इसे दो भागों में बांटती है – तेलंगाना व् कर्णाटक पठार .इसकी उतरी सीमा तपती नदी बनाती है ।
  • मेघालय का पठार प्रायद्वीपीय पठार का ही भाग है ।
Physiography of India

भारत के तटीय मैदान (Coastal Plains of India)

  • दक्षिणी पठार के पूर्व तथा पश्चिम में दो संकरे मैद्दन हैं जिन्हें क्रमशः पश्चिमी तटीय मैदान तथा पूर्वी तटीय मैदान कहते हैं . इनका विवरण इस प्रकार से है-

पश्चिमी – तटीय मैदान (Western Coastal Plains of India)

  • यह मैदान पश्चिमी ठाट तथा अरब सागर के तात के बीच गुजरात से कन्याकुमारी के मध्य फैला हुआ है ।
  • गुजरात के कुछ भाग को छोड़कर यह सारा मैदान संकरा है ।
  • इसकी औसत चोड़ाई 64 किमी है ।
  • मुंबई से गोवा तक इस प्रदेश को कोंकण तट मध्य भाग को कन्नड़ तथा दक्षिणी भाग को मालाबार तट कहते हैं ।
  • कोंकण का मैदान 50 से 80किमी चोड़ा है ।
  • मालाबार के तट पर अनेक बालू के टाइल तथा लेगून मिलते हैं ।
  • मालाबार तट पर स्थित कोचीन बंदरगाह लेगून पर स्थित है ।
  • यह अधिक कटा फटा है जिस कारण बंदरगाहों की संख्यां यहाँ पर अधिक है ।

पूर्वी तटीय मैदान (Eastern Coast of India)

  • यह मैदान पूर्वी घाट तथा बंगाल की खाड़ी के उतर में गंगा के मुहाने से दक्षिण में कन्याकुमारी तक फैला हुआ है ।
  • तमिलनाडु में यह मैदान 100 से 120 किमी चोडा है ।
  • यह मैदान महानदी, कृष्णा तथा कावेरी नदियों के डेल्टाओं द्वारा निर्मित होने के कारण आत्यधिक उपजाऊ है ।
  • इसे महानदी एवं कृष्णा नदियों के बीच उतरी सर्कार का तट तथा तट पर कई लैगून झीलें पाई जाती हैं जिनमे चिल्का झील तथा पुलिकट झील प्रसिद्ध है ।
  • यह तट कम कटा फटा है इस वजह से यहाँ पर बंदरगाहों की संख्या कम है ।

भारत के द्वीप (Islands of India)

  • भारत में द्वीपों की कुल संख्या 247 है जिनमे 204 बंगाल की खाड़ी तथा 43 अरब सागर तथा मन्नार की खाड़ी में स्थित है ।

अंडमान -नेकोबार द्वीप समूह (Andaman- Nicobar Islands Group)

  • बंगाल की खाड़ी में स्थित इस द्वीप समूह सर्वोच्च चोटी सैडल पीक(Saddle Peak) है ।
  • भारत का का एकमात्र सक्रीय ज्वालामुखी ‘बैरन’ नेकोबार द्वीप समूह में है ।
  • भारत का दक्षिणतम स्थान ‘इंदिरा पॉइंट’ ग्रेट नेकोबार में है यह भूमध्य रेखा के निकट है बंगाल की खाड़ी के द्वीप अरब सागर के द्वीपों से तुलना में अधिक बड़े हैं .

अरब सागर के द्वीप समूह (The Arabian Sea Group of Islands)

  • इन द्वीपों की संख्या कुल 36 है ये सभी प्रवाल भीती(Coral Reefs) द्वारा बने हैं ।
  • इनमे तीन मुख्य है – लक्षद्वीप (उतर में), मिनिकॉय (दक्षिण में) कावारती (मध्य में) ।
  • इनमे से मिनिकॉय लक्षद्वीप द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है ।
  • 9 डिग्री चैनल कावारती को मिनिकॉय से अलग करती हैं ।
  • 8 डिग्री चैनल मिनोकोय द्वीप(भारत) को मालदीव से अलग करता है .

अन्य द्वीप

  • श्रीहरिकोटा द्वीप – यह प्रवाल भीती निर्मित तथा यह पुलिकट झील के आगे वाले भाग में है ।
  • पामबन द्वीप – यह द्वीप मन्नार की खाड़ी में भारत और श्रीलंका के मध्य स्थित है ।
  • न्यू मूर द्वीप – यह द्वीप बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश तथा भारत की सीमा पर हुगली पर स्थित है ।

भारत के मरुस्थलीय प्रदेश (Indian Desert)

Thar Desert

  • ग्रेट इंडियन डेजर्ट के रूप में भी जाना जाता है ।
  • यह शुष्क क्षेत्र लगभग 92,200 वर्ग मील में फैला है ।
  • दुनिया का सातवां सबसे बड़ा रेगिस्तान है।
  • थार नाम t’hul से आता है, इस रेगिस्तान की विशिष्ट रेत लकीरों के लिए एक शब्द है।
  • थार रेगिस्तान के लगभग 10 प्रतिशत में रेत के टीले हैं, जबकि शेष खस्ता चट्टानों, सूखे नमक-झील बेड और घास के मैदानों से बना है।
  • हालाँकि यह पश्चिम में सिंधु नदी की सीमा में है ।
  • थार एक शुष्क उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र है क्योंकि मॉनसून जो शेष भारत में बारिश को ले जाता है ।
  • इस क्षेत्र में अत्यधिक तापमान होता है जो सर्दियों में ठंड से लेकर गर्मी में 122 डिग्री फ़ारेनहाइट तक बढ़ जाता है।
Thar Desert
Sand Tunes of Thar Desert

कच्छ का सफेद नमक रेगिस्तान(White Salt Desert of Kutch)

  • भारत के सबसे शुष्क और सबसे गर्म क्षेत्रों में से एक कच्छ का व्हाइट साल्ट रेगिस्तान है ।
  • जिसे कच्छ का व्हाइट रण या ग्रेट रण भी कहा जाता है।
  • यह क्षेत्र पाकिस्तान में सिंध रेगिस्तान के साथ भारत की पश्चिमी सीमा पर स्थित गुजरात राज्य में लगभग 2,898 वर्ग मील में फैला हुआ है। जैसा कि इसके नाम से पता चलता है, यह रेगिस्तान सफेद नमक की परतों से ढका हुआ है, जिससे इसे बर्फ से ढके परिदृश्य का असली रूप मिल जाता है।
  • गर्मियों में औसत तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि सर्दियों में रेगिस्तान ठंड से नीचे हो जाते हैं

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