MANDI CONSPIRACY CASE-1914-15

MANDI CONSPIRACY CASE

MANDI CONSPIRACY CASE-1914-15

मंडी रियासती विद्रोह

MANDI CONSPIRACY CASE

Mandi Conspiracy Case-1914 (मंडी षड़यंत्र विद्रोह) जैसे की हम सभी जानते हैं की हमारे देश को आज़ाद करवाने के हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने अनेक आन्दोलन और विद्रोह किये जिसका परिणाम था की हमारे देश को आज़ादी मिली। मंडी  रियासत में विद्रोह और मंडी षड़यंत्र भी एक ऐसा ही विद्रोह था जो हिमाचल प्रदेश की मंडी रियासत में सन 1909  में मंडी रियासत के लोगों द्वारा वहां की भ्रष्ट सत्ता और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध था ।

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मंडी षड़यंत्र की भूमिका 1909 में हुए मंडी रियासत के विद्रोह में ही रखी जा चुकी थी । मंडी रियासत में उस समय राजा भवानी सेन का शासन था । राजा भवानी सेन का वजीर जीवानंद उपाध्य  अत्यंत भ्रष्ट, अत्याचारी  और अत्यंत क्रूर था । आम जनता और किसान उसके अत्याचारों से त्रस्त थे।

वह किसानो को डरा –धमका कर अनाज के व्यापार को अपने नियंत्रण में लेकर किसानो का आर्थिक शोषण करता था। उसने भ्रष्ट और अयोग्य कर्मचारियों को नियुक्त किया तथा अपने भाई को रियासत की सेना का मुख्या कमांडर बनाया. बेगार व्यवस्था, कर्मचारियों के अभद्र बर्ताव  और जनता के बढते हुए रोष को लेकर सरकाघाट के शोभा राम अपने शिष्टमंडल के साथ राजा के दरबार में अपनी बात रखने गए थे परन्तु वजीर की बातों में आये हुए राजा भवानी सेन ने प्रजा की शिकायतों की तरफ ध्यान नहीं दिया ।

ब्रिटिश अधिकारिओं को भी जनता में बढते हुए रोष के बारे में अवगत करवाया गया परन्तु कुछ परिणाम नहीं निकला ब्रिटिश अधिकारिओं को भी जनता में बढते हुए रोष के बारे में अवगत करवाया गया परन्तु कुछ भी परिणाम नहीं निकला।

जिसका परिणाम था की शोभा राम ने इलाके में सैंकड़ों किसानों को इकठा किया और किसानो का जलूस राजा के दरबार पहुंचा और गुस्से में आये हुए किसानों ने तहसीलदार हरदेव और एनी अधिकारियों को पकड़ कर जेल में बंद कर दिया , कचहरी , कोर्ट, थाने पर कब्ज़ा कर लिया । शहर में अराजकता फ़ैल गई और हिंसा भड़क उठी और प्रशासन व्यवस्थ फ़ैल हो गई और किसानों के नेता शोभा राम का हुकम चलने लगा।

राजा भवानी सेन ने ब्रिटिश सरकार से सहायता मांगी। ब्रिटिश सेना 32 पायनियर्स रेजिमेंट की दो कोमानियाँ मंडी मंगवाई गई और शक्ति के बल पर विद्रोह को कुचल दिया गया और क़ानून व्यवस्था बहाल की गी. ब्रिटिश अधिकारिओं की उपस्थिति में राजा ने लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए मंडी के पदडल मैदान में दरबार लगाया गया।

किसानो के नेता शोभा राम ने किसानो की मांगे प्रस्तुत की . वजीर जीवानंद को पद से हटा दिया गया . किसानों की मांग पर करों पर कमी की गई और अनाज को खुले में बेचने की अनुमति प्रदान की गई। ब्रिटिश अधिकारिओं के वापिस लोट जाने पर राजा ने आन्दोलनकारी शोभा और अन्य लोगों पर देश द्रोह का मुकद्दमा दाल कर उन्हें कारवास में डाल दिया । 

Mandi Conspiracy Case of Mandi Riyasat

1914-15 में मंडी षड्यंत्र(Mandi Conspiracy) ग़दर पार्टी के कुछ सदस्यों के प्रभाव का परिणाम था, जो अमेरिका से लौटे थे और पंजाब में एक क्रांतिकारी संगठन में काम कर रहे थे. उन्होंने खुद को मंडी और सुकेत में फैला लिया था और अधिक से अधिक लोगों क्रांतिकारी आन्दोलन में जुटा सके ।

1914-15 में मंडी षड्यंत्र (Mandi Conspiracy) 1912 में राजा भवानी सेन की मृत्यु के पश्चात उसकी विधवा रानी ललिता कुमारी थी जिसे की लोग रानी खैरगढ़ी के नाम से भी पुकारते थे ने राज् वैभव त्याग कर स्वतंत्रता आन्दोलन में क्रांति की राह अपनाई .मंडी में लाला लाजपत राय से सम्बंधित क्रांतिकारी संगठन को नेतृत्व और आर्थिक योगदान दिया।

1913 में मंडी के हरदेव राम ने अध्यापक की नौकरी  को छोड़कर  अमेरिका होते हुए जापान और शंघाई चले गये और वहां पर ग़दर पार्टी में नेता मधुरा सिंह से मिलकर हरदेव राम ग़दर पार्टी में शामिल हुए 1914  में ग़दर पार्टी के क्रांतिकारी बनकर वापिस लोटे।

मंडी और सुकेत में ग़दर पार्टी के पम्फलेट ‘ग़दर की गूँज’ ‘ग़दर सन्देश’, ‘ऐलान-ए-जंग’, भारत माता की फ़रियाद’ , ‘हिन्दुस्तान हमारा’ आदि साहित्यों को लोगों पड़कर सुनकर प्रेरित करने का प्रयास किया।

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क्या था मंडी षड़यंत्र (Mandi Conspiracy Case)?

क्रांतिकारी संगठन में बद्री नाथ, शारदा राम, ज्वाला सिंह, दलीप सिंह, जवाहर सिंह, सिधु खराड़ा और लोंगु राम थे ।रानी ललिता इनकी मुख्या सहयोगी थी

पंजाबी क्रांति दल के नेता रास बिहारी बोस, सुरजन सिंह, निधान सिंह और किसन सिंह मंडी के क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण दे रहे थे। क्रांतिकारिय मंडी में ब्रिटिश सुपेरिनटेनडेंट, वजीर को मारना चाहते थे और मंडी में सरकारी कोष को लूटना चाहते थे तथा योजना के हिसाब से क्रांतिकारियों ने धन जुटाने के उद्देश्य से नागचला में सरकारी खजाने को लूटा परन्तु दलीप सिंह और पंजाब के क्रांतिकारी निधान सिंह पकडे गए। पुलिस की यातनाओं से तंग आकर संगठन का भेद खुल गया।

मंडी षड्यंत्र के परिणाम (Result of Mandi Conspiracy Case)

Mandi Conspiracy Case
Freedome fighter Bhai Hirda Ram

Mandi Conspiracy case मियां जवाहर सिंह, शारदा राम, ज्वाला राम , बद्री नाथ और लोंगु राम को पकड़कर जेल में दाल दिया गया और रानी ललिता को रियासत से निकाल किया गया और सिधु खरडा भाग निकले।

मंडी के क्रांतिकारी हरदेव राम कार्यकर्ता भाई हिरदा राम से मिले तथा भाई हिरदा राम ने उनसे प्रभावित होकर दिसम्बर 1914 में क्रांति का प्रशिक्षण लेने के लिए अमृतसर गए तथा अमृतसर से वापिस आ कर उन्होंने धर्मशाला में बम्ब बनाने का कार्य किया ।

फरबरी 1915 को क्रांतिकारी मूला सिंह ने चाबा में डाका डाला तथा पुलिस की खोज में वह पकड़ा गया। पुलिस के कुछ भेदिये क्रांतिकारी दल में भी शामिल थे तथा उन्होंने पुलिस को ग़दर पार्टी की गतिविधि की खबर कर दी और 19 फरबरी  1915 को भाई हिरदा राम, डॉ.मधुरा सिंह, करतार सिंह, खड़क सिंह और महाराष्ट्र के क्रांतिकारी पिंगले पकडे गये और उन पर लाहोर षड़यंत्र के मामले में मुक्कदमा चलाकर उन्हें प्राणदंड दिया गया परन्तु प्राणदंड की सजा को बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया। इनको कारावास की सजा देने के लिये अंडमान की जेल में भेज दिया गया ।

1916 की शुरुआत में, सुकेत और उना में ग़दर पार्टी के क्रांतिकारी फिर से सक्रीय हो गये उन्होंने उन्होंने भी अँगरेज़ अधिकारियों को मारने की योजना बनाई तथा उना के ऋषिकेश लट्ठ के क्रांतिकारी दल का भेद खुल गया और वे भूमिगत होकर बाद में इरान में जा कर ग़दर पार्टी में शामिल हुए ।

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