General Knowledge SHAHJAHAN

मुग़ल वंश 

शाहजहां (1628-1658 AD)

        Taj Mahal 

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); शाहजहां, 1628 ईस्वी को में राजगद्दी(Came to power in 1628) पर बैठा।

शाहजहां का वास्तविक नाम खुर्रम(Real name was Khurram) था।

शाहजहाँ की माता का नाम जगत गोसाई/जोधा बाई(Jodha Bai) था जो की राजा जगत सिंह की पुत्री थी।

शाहजहां को उसकी विदेश निति (Known for his foreign policy)के जाना जाता है।

शाहजहां का विवाह अर्जुमंद बानो बेगम (Arjumand Bano Begum)से हुआ था।

अर्जुमंद बानो बेगम को शाहजहां ने मल्लिका -ए-ज़मानी(Mallika-e- Zamani) की उपाधि प्रदान की।

अर्जुमंद बानो बेगम को मुमताज़ महल (Also known as Mumtaz Mahal)के नाम से जाना जाता है।

मुमताज़ महल आसफ खान(Daughter of Asaf Khan) की पुत्री थी।

शाहजहां ‘अबुल मुजफ्फर  साहिब किरण-ए- सानी (Abul Mujaffar Sahib Kiran-e-Sani)’की उपाधि के साथ गद्दी पर बैठा।

शाहजहां ने महावत खान को खानखाना (Khanekhan title to Mahavat Khan)की उपाधि दी।

जहांगीर ने अपने लिए अति सूंदर मयूर सिंहासन बनाया था जिसमे की कोहिनूर हीरा लगाया गया था। माना जाता है कि आधुनिक अनुमानों के अनुसार इसकी कीमत लाखों डॉलर है।

गद्दी पर बैठते ही शाहजहां को बुंदेलखंड(1628-35)और दक्कन में विद्रोह (1629-31 )(Faced revolt in Bundelkhand and Deccan)का सामना करना पड़ा।

पदग्रहण के 3 वर्ष बाद ही  शाहजहां की बेगम (Death of Mumtaz Mahal)की मृत्यु हो गई।

ताजमहल का निर्माण

मुगल सम्राट शाहजहाँ के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक ताजमहल का निर्माण था। उनकी प्यारी पत्नी मुमताज़ महल की मृत्यु उनके  बच्चे को जन्म देते समय हो गई और उनकी मृत्यु के पीछे का कारण प्रसवोत्तर रक्तस्राव बताया गया। इसके बाद शाहजहाँ तबाह हो गया, जिसने तब अपनी पत्नी की याद में दुनिया का सबसे खूबसूरत स्मारक बनाने का फैसला किया। कई वर्षों की योजना, कड़ी मेहनत और अपार बलिदानों के बाद, स्मारक, जिसे ताजमहल के रूप में जाना जाता है, बनाया गया था। दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लोग सिर्फ इस अद्भुत सफेद रंग की एडिफ़ाइस को देखने के लिए भारत की यात्रा करते हैं, जो एक भी है भारत के सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक है। ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में से एक है!

शाहजहां ने मुमताज़ की याद में आगरा में ताजमहल (Taj Mahal)के नाम से स्मारक( 1632-53) बनवाया।

ताजमहल का वास्तुविद उस्ताद ईसा( Ustad Isa Khan) खान था।

 ताजमहल का नक्शा उस्ताद अहमद लाहोरी (Map was made by Ahmad Lahori)ने तैयार किया था।

ताजमहल के निर्माण के लिए संगमरमर मकराना(राजस्थान)(Makrana Rajasthan) से प्राप्त हुआ।

1631-32 में शाहजहां ने पुर्तग़ालिओं को युद्ध में हराया (Defeated Pourtgueese)और उनके द्वारा हुगली में स्थित व्यापारिक केंद्र(Took control over Hugli) को अपने अधिकार में ले लिया।

शाहजहां  ने दिल्ली के निकट शाहजहानाबाद नगर(Shahjahanabad Nagar also known as Purani Delhi)की स्थापना की और आगरा से राजधानी इस स्थान पर (Capital was shifted from Agra to Shahjahanabad)परिवर्तित की। इसे आजकल पुरानी दिल्ली  नाम से जाना जाता है।

इसी में उसमे  सुरक्षा दुर्ग का निर्माण करवाया जिसे लाल किला(Red Fort) या कुल -ए -मुबारक के नाम से जाना जाता है।

सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद का शाहजहां (Fought with Guru Har Govind)से संघर्ष हुआ।

                                                                      Red Fort


उसने इसी किले में दीवान -ए -आम और दीवान-ए- खास (Diwan-e-Aam and Diwan-e- Khas)का निर्माण करवाया।  लाल किले में स्थित मोती मस्जिद(Moti Masjid) का निर्माण औरंगज़ेब ने करवाया था।

शाहजहां ने आगरा में मोती मस्जिद(Moti Masjid) तथा दिल्ली में जामा मस्जिद(Jama Masjid) का निर्माण करवाया।

वास्तुकाल की दृष्टि से शाहजहां के शासनकाल को द्धितीय स्वर्ण काल (Second Golden Age)के नाम से भी जाना जाता है।

शाहजहां के पुत्र दारा शिकोह, शुजा, औरंज़ेब व मुराद (Had four Sonsथे। शाहजहां की तीन पुत्रियां (Three daughters) भी थी।

शाहजहां ने दारा शिकोह को अपना उत्तराधिकारी घोषित (Declared Dara Shikob his successor)किया था।

शाहजहां के बीमार पड़ने पर उत्तराधिकारी युद्ध फरवरी, 1658 में बहादुरपुर में हुआ।

उत्तराधिकार के अंतिम लड़ाई अप्रेल 1659 में , दारा एवं औरंगज़ेब के बीच में हुई जिसमे औरंगज़ेब को विजय प्राप्त हुई।

दारा शिकोह एक विद्धान व्यक्ति था उसने उपनिष्दों का फारसी में अनुवाद (Translated Upnishads)करवाया।

दारा को इस्लाम धर्म की अवहेलना करने के आरोप में मृत्यु दंड (Death penalty)दिया गया।

शाहजहाँ ने मयूर सिंहांसन का निर्माण बेबादल खान से करवाया।

शाहजहां को निर्माताओं का राजकुमार(Prince of Builders) कहा जाता है।

शाहजहां के जीवन के अंतिम दिन काफी दुःख भरे बीते। 

औरंगज़ेब ने शाहजहां को कैद कर आगरा(Imprisoned Shahjahan in Agra Fort) के किले में रखा था जहां  जनवरी 1666 के पहले सप्ताह में, शाहजहाँ एक बार फिर बीमार पड़ गया और फिर कभी नहीं उबर पाया। 22 जनवरी को कहा जाता है कि उसने अकबराबादी महल को बुलवाया और अपनी बेटी जहाँआरा बेगम की देखभाल करने का अनुरोध किया। उसके बाद कहा जाता है कि उसने अपनी अंतिम सांस लेने से पहले पवित्र कुरान से कुछ पंक्तियों को सुनाया था, जिसकी आयु 74 वर्ष थी। वह सम्राट जिसने एक बार पूरे भारत पर शासन किया था और एक कैदी की मृत्यु हो गई थी। राजकुमारी जहाँआरा बेगम राज्य के कुलीनों के साथ पूरे आगरा में अपने पिता के पार्थिव शरीर को ले कर जुलूस निकालना चाहती थीं ताकि विषय अपने प्रिय सम्राट को अंतिम अलविदा कह सकें। हालांकि, औरंगजेब इस तरह के एक असाधारण अंतिम संस्कार के मूड में नहीं था। अंत में, सैय्यद मुहम्मद कन्नौजी और काजी कुर्बान ने शाहजहाँ के शरीर को जेल से बाहर निकाला, उसे धोया और चंदन से बने ताबूत में रखा। ताबूत को नदी के माध्यम से ताजमहल में लाया गया, जहां उसे आराम करने के लिए रखा गया था, उसकी प्यारी पत्नी मुमताज के बगल में उसकी मृत्यु हो गई।

शाहजहां की अर्थी को  नौकरों और हिजड़ो (Slaves and Eunuchs buried Shajahan)ने कंधा दिया।

शाहजहां के शासनकाल के 20 वर्षों के इसिहास को अब्दुल हामिद लाहोरी (Hamid Lahori)ने पादशाहनाम (Paadshahnaama) में लिखा।

महाभारत का फारसी में अनुवाद रज्मनामा(Raznmnama) के नाम से शाहजहां के शासनकाल में किया गया।


इनके बारे में भी पढें –
 

अकबर, जहाँगिर, बाबरहुमायूँ , तुग़लक़ वंश 

शाहजहाँ ने अपने शासन के दौरान निम्नलिखित स्मारक भी बनवाए थे:
1. लाल किला (दिल्ली)(Red Fort)
2. आगरा किले के खंड
3. जामा मस्जिद (दिल्ली)

                                                                         4.  मोती मस्जिद या मोती मस्जिद (लाहौर)

5. शालीमार गार्डन (लाहौर)
6. लाहौर किले के खंड (लाहौर)
7.जहाँगीर मकबरा
8. तख़्त-ए-Taus
9.शाहजहाँ मस्जिद (थाटा)

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